Archive for the ‘संस्कृति’ Category

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रोशनी के घेरे

सितम्बर 21, 2006

कभी बचपन में स्कूल में श्रीमती सरोजिनी नायडू की एक कविता पढ़ी थी- ‘द बैंगिल सैलर्ज़‘. यह गीतात्मक कविता पढ़ हृदय में कितने ही भाव हिलोरें लेने लगते हैं. चूड़ियाँ मानों भारतीय नारी की चिरसखी हैं, यह बात ये कविता सहज ढंग से कह जाती है. चूड़ियों के इन्द्रधनुषी रंगो से सजा कल्पनालोक, उनकी मधुर खनक, चूड़ी वाले की टेर पर चूड़ी खरीदने घर से बाहर की ओर दौड़ती स्त्रियां, छोटी बच्चियों जैसे उत्साह के साथ रंग पसंद करती और तरह-तरह की चूड़ियों की तुलना करती स्त्रियां – ये सारे चित्र इस कविता के साथ मानो सजीव हो जाते हैं और कानों में गूँज उठते हैं मोलभाव में लगे उत्साहित मधुर स्वर. भारत के शहरों, गाँवों और आस-पड़ोस में यह दृश्य आम है. एक दृश्य, जिसकी कल्पना मात्र से ही मन भाव-विभोर हो उठता है. कितना अद्भुत है न, चूड़ी जैसी साधारण वस्तु कैसी प्रसन्नता का कारण बनती है!

मेरी माँ की चूडि़यों की खनक मात्र एक ध्वनि नहीं थी अपितु मेरी माँ का संपूर्ण अस्तित्व था. मुझे याद आते हैं वे दिन जब मैं उन चूड़ियों की खनक से उठा करती थी. चूड़ियाँ, जो माँ के काम करते, हमारे लिये नाश्ता बनाते, हमें स्कूल के लिये तैयार करते बस यूँ ही बोल उठती थीं. जब कभी माँ कहीं बाहर जातीं तो उनके घर मे आने से पूर्व ही उन चूड़ियों की ध्वनि मुझे उनकी आहट दे जाती. जब कभी माँ मेरी नज़रों से ओझल हो किसी पड़ोसी से बात कर रही होतीं तब मैं इस आवाज़ से उनकी उपस्थिति को महसूस कर लेती. ये माँ की चूडि़याँ ही थीं जिनकी खामोशी ने मुझसे अक्सर वह सब कहा जो माँ कभी किसी से न कह सकीं. काँच के ये घेरे हर उस दौर के प्रतीक हैं जिनसे मेरी माँ कभी गुज़रीं.

चूड़ियाँ हर लड़की को आह्लादित करती हैं. मुझे याद है बचपन में एक बार जब मैनें चमकीली गुलाबी चूड़ियाँ पहनी थी. मैं उन्हें स्कूल भी पहन के गयी थी, दोस्तों को दिखाने के लिये. काँच की चूडियाँ भारत के कई भागों में विवाहित स्त्रियों द्वारा विवाह के पवित्र बंधन के प्रतीक के रूप में पहनी जाती हैं. हाँ, क्षेत्रों के अनुसार रंगों में विविधता पायी जाती है. प्रत्येक क्षेत्र की अलग परम्परा है और चूड़ियों का रंग व प्रकार उसी पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिये महाराष्ट्र में विवाहित स्त्रियाँ हरे रंग की चूड़ियाँ पहनती हैं तो बंगाल व उड़ीसा में सीप की बनी सफ़ेद चूड़ियों को चटख़ लाल चूड़ियों के साथ मिलाकर पहना जाता है.

भारत में काँच का सर्वाधिक सामान आगरा के निकट फ़िरोज़ाबाद नामक छोटे से शहर में बनाया जाता है. इस शहर के अधिकांश लोग काँच के किसी न किसी सामान के निर्माण से जुड़े उद्यम में लगे हैं. सबसे अधिक काँच की चूड़ियों का निर्माण इसी शहर में होता है. रंगीन काँच को गलाने के बाद उसे खींच कर तार के समान बनाया जाता है और एक बेलनाकार ढाँचे पर कुंडली के आकार में लपेटा जाता है. स्प्रिंग के समान दिखने वाली इस संरचना को काट कर खुले सिरों वाली चूड़ियाँ तैयार कर ली जातीं हैं. अब इन खुले सिरों वाली चूड़ियों के विधिपूर्वक न सिर्फ़ ये सिरे जोड़े जाते हैं बल्कि चूड़ियाँ एकरूप भी की जाती हैं ताकि जुड़े सिरों पर काँच का कोई टुकड़ा निकला न रह जाये. यह एक धीमी प्रक्रिया है जिसमें काँच को गर्म व ठण्डा करना पड़ता है. कितनी विस्मयकारी बात है न कि किसी नारी की कलाइयों की शोभा बनने से पहले ये चूड़ियाँ कितने हाथों से गुज़रती हैं!

आन्ध्रप्रदेश का हैदराबाद शहर भी अपनी चूड़ियों के लिये विख्यात है. चारमीनार के चारों ओर कतारों में लगी अनेक दुकानें चूड़ियों की चकाचौंध से जगमगाती रहती हैं. यहाँ काँच की चूड़ियों के विविध प्रकार मिलते तो मिलते ही हैं, साथ ही मिलती हैं रत्न-जड़ित चूड़ियाँ, धातु से बनी चूड़ियाँ, सर्पाकार चूड़ियाँ, शीशा-जड़ित चूड़ियाँ, सादी चूड़ियाँ, विभूषित चूड़ियाँ, पतली नाज़ुक चूड़ियाँ और चौकोर तथा तिकोने जैसे अनोखे आकार की चूड़ियाँ. दूर-दराज़ और आस-पास दोनों ही जगहों से इन चूड़ियों की ख़रीदारी के लिये लोगों की भारी भीड़ जुटती है.

भारतीय नारियों के द्वारा चूड़ियों का पहना जाना एक लम्बे अरसे से चला आ रहा है. मोहनजोदड़ो से मिले अवशेष इस प्राचीन परम्परा की पुष्टि करते हैं. विशेष ध्यान देने योग्य है कि हालांकि अन्य सभ्यताओं में भी चूड़ियाँ पहनी जाती रही हैं किन्तु भारत में मुख्यत: विवाह के अवसर से जुड़ी यह एक महत्वपूर्ण परम्‍परा बन गई है. आज भी चूड़ियों को उसी उल्लास और ललक के साथ पहना जाता है जैसा कि पहले. यह अलग बात है कि शहरों, विशेषत: महानगरों में इस परम्परा के ह्रास के चिह्न देखे जा सकते हैं. नारियों की कलाइयों की शोभा बढ़ाते ये चमकीले घेरे एक आभूषण मात्र नहीं हैं. इनकी छोटी सी परिधि में भारतीय स्त्री के सुख-दु:ख तथा धैर्य सिमटे हैं, उसकी आशायें बंधी हैं.

सम्बन्धित कड़ी: सर्फ़-इण्डिया पर विभिन्न प्रकार की चूड़ियों की जानकारी