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इन्दौर के बढ़ते कदम

अक्टूबर 11, 2006

इन्दौर – विकास की राह पर तेज़ी से अपने कदम बढ़ाता एक शहर. यह शहर मुझे हमेशा से ही अपने घर की तरह प्रिय रहा है. यह बात अलग है कि यहाँ न तो मेरा घर है और न ही कोई रिश्तेदार! जो भी हो, मुझे इस शहर से बेहद लगाव है. चाहे कोई अमीर हो या ग़रीब, इस शहर ने हर एक को अपनाया है.

क्या नहीं है यहाँ? मराठों का इतिहास, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कई शिक्षण संस्थान. और हाँ, मैं शब-ए-मालवा को कैसे भूल सकता हूँ, गर्मियों की वो सुहानी शामें और वो ठण्डी हवायें, आह! “जैसे सहराओं में हौले से चले बाद-ए-नसीम!”

भारत के कोने-कोने से आकर यहाँ कितनी ही पीढ़ियों से लोग बसे हैं. मराठी, सिंधी, दक्षिण भारतीय, पंजाबी, मारवाड़ी, राजस्थानी और मालवा के मूल निवासी तो हैं हीं. खान-पान भी सभी प्रकार का, सभी प्रकार के भारतीय व्यंजन. इतनी विविधता है, इसीलिये तो इसको अक्सर मिनी-मुंबई कह दिया जाता है.

इन्दौर से एक घण्टे की दूरी पर हैं सतपुड़ा की पहाड़ियाँ, नर्मदा की घाटी तथा ओंकारेश्वर और महाकाल के मन्दिर. ओंकारेश्वर का धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही यहां की प्राकृतिक भी छटा देखते ही बनती है. यहाँ नर्मदा नदी ॐ की आकृति बनाती है.

इन्दौर को मध्य भारत की वाणिज्यिक राजधानी भी कहा जाता है और यहाँ सबकी पसंद और जेब के हिसाब से बहुत से बाज़ार हैं. ग्लोबस और रेडियो मिर्ची सबसे पहले यहीं आरम्भ हुये थे, और अब सेज़ और कई अन्य सूचना प्रौद्योगिकी पार्क भी शहर का मुख्य हिस्सा हो गये हैं.

अब मैं घूम-फिरकर उस बात पर आता हूँ जिसने मुझे इस लेख को लिखने को प्रेरित किया, और वह है इन्दौर का सड़क परिवहन तंत्र. इन्दौर का आधुनिक सड़क परिवहन तंत्र किसी भी विकसित देश को टक्कर देता है. अन्य सुविधाओं के अलावा इन्दौर के पास अभी ५० टाटा स्टार बसें हैं, जिनमें उपग्रहों से संचालित जी.पी.एस. के अलावा कम्प्यूटरीकृत टिकट मशीनें भी हैं! बस स्थानकों पर भी इलेक्ट्रानिक सूचना पट लगे हैं जिन पर यह देखा जा सकता है कि कौन सी बस कहां है, और कितनी देर में अमुक स्थानक तक पहुंचेगी. और इतनी सारी सुविधायें पुरानी नगर बस सेवा के किराये पर ही! इसके बावजूद भी इन्दौर नगर निगम ३-४ महीनों में ही इस सेवा से १ करोड़ रुपये का लाभ उठा चुका है. ये बसें समय पर आती हैं और विभिन्न मार्गों के हिसाब से अलग-अलग रंगों की हैं. बसों के कर्मचारियों को जनता के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिये, इस बारे में भी एक प्रबंधन संस्था कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रही है. बसों के रख-रखाव पर तो विशेष ध्यान दिया ही जा रहा है.

इन्दौर के जिला कलक्टर श्री विवेक अग्रवाल के प्रयासों से ही यह सब संभव हो सका है. अभी फोन करके टैक्सी बुलाने की सार्वजनिक सेवा भी जल्दी ही शुरु होगी, और सड़कों पर पुराने टैम्पुओं का बोझ कुछ हल्का होगा.

दिल्ली को इन्दौर से इस बारे में कुछ सीखना चाहिये. दिल्ली चार साल में इस प्रकार की केवल ६ बसें ही सड़कों पर उतार पाया है. अभी अहमदाबाद ने भी इन्दौर के नक़्शे-क़दम पर चलने का निर्णय लिया है. बाकी बड़े शहरों को भी श्री अग्रवाल के इन्दौर से कुछ सबक लेना होगा. भारत ऐसे ही धीरे-धीरे विकास के मार्ग पर बढ़ता रहे, शुभकामनायें!

14 टिप्पणिया

  1. इन्दौर के बारे में जान कर प्रसंता हुई. यहाँ कुछ तस्वीरे भी होती तो ज्यादा मजा आता.
    मारवाड़ी तथा राजस्थानी दोनो एक ही है.


  2. सारे महान कार्यों के पीचे दूरदर्शी लोगों का हाथ होता है। यह वही इन्दौर है जहाँ सारे नगर में फुटपाथों पर अतिक्रमण करके दुकाने ही दुकाने बनी हुई थीं। इन्दौर को अतिक्रमण से लगभग मुक्त करने, चौड़ी सड़कें देने, और अत्याधुनिक परिवहन व्यवस्था देने का मुख्य श्रेय कैलाश विजयवर्गीय को भी जाता चाहिये।

    एक बात और- इन्दौर में चुम्बकीय उठाव(लैविटेशन) पर आधारित तीव्रगामी गाड़ियाँ चलाने का भी प्रस्ताव है।

    पर एक बात की कमी है-इन्दौर में पेड़ों और हरियाली की कमी को पूरा किया जाना चाहिये।


  3. इन्दौर की तारीफ पढकर अच्छा लगा..ये शहर मेरा अपना है! धन्यवाद.


  4. वाकई…यादें ताजा कर दी आपने इन्दौर की…और ये बस वाली जानकारी विस्तार में आपसे ही जानी..अन्यथा वो नीली बसें और टेम्पो ही याद हैं..और खान पान के तो कहने ही क्या…उम्म्म…

    संजय जी..मेरे विचार में मारवाडी और राजस्थानी एक ही नही होंगे…मारवाड राजस्थान का एक इलाका है और वहाँ से आया हुआ व्यक्ति मारवाडी कहलायेगा, जबकि राजस्थानी पूरे राजस्थान में कहीं से भी सम्बंध रखते व्यक्ति को कह सकते हैं…


  5. यार तुम्हारे ब्लाग मे दो समस्याये हैं. इसकी फीड बार बार नारद डाउन कर रही है। दूसरे तुम्हारी प्रोफाइल पर कोई नाम क्यो नही है। यार नाम बताने में क्या शर्म, कोई मस्तराम थोड़े लिख रहे हो।


  6. इन्दौर विकास के मामले में पहले से ज़रा सा सुधरा है लेकिन इतना भी कितने दिन सुधरा रहता है और कितना और सुधरता है ये उपर वाला जाने – अभी दो-चार ढंग-ढाले के बंदों का तबादला होगया तो गई भैंस पानी में. आधारभूत संरचना के मामले में बहुत पीछे है मेरा शहर – हां खाने के अड्डे और बाकी इन्दौरी सुख तो तीन लोक से निराले हैं.


  7. Bhai ye upar wala jitu kaun hai,
    hame samajh mein nahi aa raha kaun banda hai,

    Bhai, hamne ye comment nahi kiya hai.


  8. वन्दे मातरम!!

    नीं यार..!! सई के रये हो क्या?
    यार, अपन तो वाँ से चले थे तो ऐसा तो कुछ बी नी था..!.
    बस-बीस के नाम पे तो बस नगरसेवा ईच्च चलती थी.
    ओर टेम्पों तो भोत ई सई थे (थे? कि हेंगे?) क्या मजे से ठस्समठस बेठ के जाते थे ..ओर वो – “..बच्चे को गोदी में लेना आँटीजी..”कंडक्टर (भीया टेम्पो मे भी तो कंडक्टर होता हेगा कि नी?) का केना.

    बेसे, तो आप्ने सब बता दिया पन जरा रोड के हाल बी तो के देते. “सड़क परिवहन तंत्र” बिना सड़क के काँ तक चल्लिया है??

    पन भीया…जैसा भी हेगा..अपने को तो अपना इंदोर ईच भोत सई लगता है..सच. वो राजबाड़ा,..वो पोहे-जलेबी..वो शिकंजी..!!

    सच भीया, अपन तो भोत मिस कर्रये हेंगे अपना इंदौर.


  9. यह तो बड़े आश्चर्य की बात है कि जीतू भाई का नक़ाब लगाकर कोई और सज्जन टिप्पणी कर गये! यदि असली वाले जीतू भाई को आपत्ति न हो तो हम कहना चाहेंगे कि हमें टिप्पणियों की संख्या बढ़ने पर खुशी हुई.


  10. भिया यदि ऐसा हुआ है तो गजब हो गिया.. मै पिछले साल घर गया था तब तक तो कुछ बी नी हुआ था
    खैर यदि ऐसा है तो आपके मुह में घी शक्कर!


  11. इंदौर ने इतनी तरक्की कर ली है, सुन कर सुखद आश्चर्य हुआ।
    भारत के बाकी शहरों को इससे सबक लेना चाहिये।
    वैसे, दिल्ली की मेट्रो भी कुछ कम नहीं है, बहुत ही बढिया तरह से काम कर रही है।
    बङे-बङे प्लेटफार्म हैं और समय बताने की घङियाँ लगीं हैं, शायद मेट्रो भी जीपीएस पर ही चलती है।


  12. priya mitra
    aapka blog pada . indore ke bare me net par pad kar accha laga
    me indore ka banda hu aur patrakar hu indore ke bare me short me acchha likha he
    indore se onkareshwar and ujjjain karib 70 and 55km he
    ek ghante me to nahi par 2 gante me ujjain our 2.30 3 ghante me onkareshwar pahuch ja sakte he
    hindi me type karne ki suvidha nahi hone se maine english me likh raha hu
    apna name our email add likhna
    mera email addd apke paass he
    dr kamal hetawal]


  13. priya mitra
    aapka blog pada . indore ke bare me net par pad kar accha laga
    mai indore aa raha hoo aane ke bad apna vichar rakhoonga


  14. aap sabhee ko dhanyavad jo aap sabane milkar indore ko es mukam par pahuchaaya.aaj indore aane par bahut khushee hoti hai ke aap sabhee ke prayaas se indore mini bombay ho gayaa.meri duaaye aap sabhee ke saath hai.

    Thanks
    Rajesh Dighe



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