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संभावनाओं के द्वार

अक्टूबर 3, 2006

मुझे अभी भी वे दिन अच्छी तरह से याद हैं. मैं छोटा था और मेरे रिश्ते के कुछ भाई-बहन अमरीका और यूरोप में अपनी पढ़ाई करने गये थे. जब भी वे वापस भारत आते तो अपने संग न जाने कितने किस्से कहानियाँ लाते. बाहर की दुनियाँ के किस्से मैं बड़े चाव से सुनता था. वे कहते थे कि मैं भी बड़ा होकर इन बड़े-बड़े देशों में घूमूँगा. उन्होंने मुझे यह भी बताया कि भारत अमरीका-यूरोप से ५० साल पीछे है और यहां अवसरों की बहुत कमी है.

संयोगवश मैं भी यूरोप आया और मुझे यहाँ ऐसा कुछ विशेष नहीं लगा जो कि मेरे बचपन की कल्पना से मेल खाता. मुझे समझ नहीं आया कि यहाँ भारत के किसी भी आधुनिक शहर के मुकाबले ऐसा क्या खास है? मैंने अपनी बहन से फोन पर पूछा तो उन्होंने कहा, “किड्डू, हम तो वहाँ १५ साल पहले थे, और अब ज़माना बदल रहा है. भारत में भी कई बदलाव हो रहे हैं, और अच्छे के लिये हो रहे हैं.” बाद में एक कम्प्यूटर पत्रिका के लिये साक्षात्कार देते समय मैंने अपनी बहन के ये शब्द पत्रकार के सामने भी रखे. आज भारत बदल चुका है और यहाँ अवसरों की कोई कमी नहीं है. यह बात आई.बी.ई.एफ़. के द्वारा स्थापित संगठन ‘इण्डिया ऐवरीव्हेयर´ ने लगभग छ: महीने पहले डावोस, स्विट्ज़रलैण्ड में विश्व आर्थिक मंच में स्पष्ट रूप से कही है. भारत में वह सब कुछ है जो इसको २०२० तक विकसित देशों की सूची में ला खड़ा करेगा. आज स्थिति यह है कि यदि कोई व्यक्ति अथवा संस्था अपनी पूजी लगाकर पूरी संतुष्टि चाहता है तो भारत में निवेश करता है अथवा किसी भारतीय कंपनी की सेवायें लेता है. मौके का लाभ उठाकर मैंने भी अभी हाल में ही अपने एक मित्र के साथ मिलकर एक IT/ITES कंपनी शुरु कर दी है. मैं ऐसा साहस इसीलिये कर सका कि मुझको भारत की अर्थव्यवस्था पर पूरा भरोसा है.

कोई भी क्षेत्र हो, IT/ITES, बायोटेक, दवा, अंतरिक्ष, विज्ञान, फ़ैशन, बैंकिंग अथवा वित्त, सभी में भारतीय लोगों ने कठिन परिश्रम कर अपनी एक पहचान बनाई है. न सिर्फ़ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, बल्कि छोटी कंपनियाँ और हम जैसे व्यक्ति भी इस तथ्य को समझ पा रहे हैं और इसका लाभ उठाकर स्वयं को और अपने देश को कुछ दे पा रहे हैं. मैककिंजी के माइकल फ़र्नांडीज़ के अनुसार भारत में फुटकर बाज़ार की कीमत अगले ५-६ बर्षों में करीब ५०० अरब अमरीकी डालर हो जायेगी. अब कौन ऐसा मौका गंवाना चाहेगा! द्वार सबके लिये खुले हैं.

5 टिप्पणिया

  1. Sirji, I agree with you that India is changing for good, but all the investment does not make a developed country. If you can see that we will eliminate poverty and hunger to 99% extent, then we will be developed in real sense.


  2. मैं आपसे सहमत हूँ कि भारत में संभावनायें काफ़ी खुल रही हैं, और हम “so called developed country” बनने की ओर अग्रसर हो रहे हैं, मगर साथ ही साथ मैं आशीष जी की बात से सहमत हूँ- जब तक गरीबी और भूख नहीं हटॆगी, तब तक “developed country” बनना एक ख्वाब ही है.

    भारत में problem यह है कि – गरीब हमेशा ही गरीब रहता है, और अमीर और ज्यादा अमीर होता जाता है! ऐसा मेरा मानना है।


  3. निश्चय ही भारत की तेज़ी से उन्नति हो रही है। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि यहाँ धनवानों और निर्धनों के बीच की ख़ाई में इज़ाफ़ा हुआ है।


  4. आप लोगों की टिप्पणियों का धन्यवाद. आपने बहुत सटीक प्रश्न सामने रखा है. इस बिन्दु को लेकर एक आलेख लिखा जा रहा है, जल्द ही आपके सामने होगा.


  5. उम्मीद है अगले पांच वर्षों के बाद किसी भी भारती को रोज़ी रोटी और पढाई के लिए विदेश जाने की बिलकुल ज़रूरत ना पडे। और तब देखना कोई भी भारती अपना देश छोड विदेष मे नौकरी और पढाई के लिए जाने को पसंद नही करेगा क्योंकि यहां सब कुछ मिलेगा🙂



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