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हम करें राष्ट्र आराधन

अक्टूबर 1, 2006

एक गीत की धुन से पूरा सभागार गूँज रहा है. इस जोशीले देशभक्ति गीत ने सबके पैरों को थिरकने पर मजबूर कर दिया है. शब्दों के साथ-साथ संगीत भी मंत्रमुग्ध कर देने वाला है. गीत के बोल हैं – हम करें राष्ट्र आराधन.

यह गीत ९० के दशक के दूरदर्शन धारावाहिक ‘चाणक्य’ का प्रमुख गीत था. चाणक्य भारत के अग्रणी राजनैतिक विचारकों में से एक थे. फिर भी उनके बारे में अधिक लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है. इस धारावाहिक ने उनके जैसे महान व्यक्ति का जीवन-चित्र प्रस्तुत कर एक सराहनीय कार्य किया. भारत के बाहर लोग चाणक्य के बारे में बहुत कम ही जानते हैं जबकि मैकियावेली जैसे दूसरे देशों के राजनैतिक विचारक सुविख्यात हैं.
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चाणक्य या कहें कि विष्णुगुप्त अथवा कौटिल्य, ने तक्षशिला विश्वविद्यालय में वेदों का गहन अध्ययन किया. क्या यह गौरव का विषय नहीं कि दुनियाँ के सबसे पुराने विश्वविद्यालय, तक्षशिला और नालन्दा भारतीय उपमहाद्वीप में थे. और हाँ, ध्यान देने योग्य बात यह है कि हम ५०० से ४०० वर्ष ईसा पूर्व की बात कर रहे हैं. तक्षशिला एक सुस्थापित शिक्षण संस्थान था और माना जाता है कि पाणिनी ने संस्कृत व्याकरण की रचना यहीं की थी. चाणक्य भी बाद में यहाँ नीतिशास्त्र के व्याख्याता हुए (कुशाग्र छात्र, है न!). ऐसा कहा जाता है कि वे व्यवहारिक उदाहरणों से पढ़ाते थे. यूनानी लोगों के तक्षशिला पर चढ़ाई करने कारण से वहाँ एक राजनैतिक उथल-पुथल मच गयी और चाणक्य को मगध में आकर बसना पड़ा. उन्हें नि:संदेह एक राजा के निर्माता के रूप में अधिक जाना जाता है. चंद्रगुप्त मौर्य विशेष रूप से उनकी सलाह मानते थे. शत्रुओं की कमज़ोरी को पहचाकर उसे अपने काम में लाने की विशिष्ट प्रतिभा के चलते चाणक्य हमेशा अपने शत्रुओं पर हावी रहे. उन्होंने तीन पुस्तकों की रचना की- ‘अर्थशास्त्र‘, ‘नीतिशास्त्र’ तथा ‘चाणक्य नीति’. ‘नीतिशास्त्र’ में भारतीय जीवन के तौर-तरीकों का विवरण है तो ‘चाणक्य नीति’ में उन विचारों का लेखा-जोखा है जिनमें चाणक्य विश्वास करते थे और जिनका वे पालन करते थे.

राष्ट्रीय नीतियों, रणनीतियों तथा विदेशी संबंधो पर लिखी गई ‘अर्थशास्त्र’ उनकी सर्वाधिक विख्यात पुस्तक है. प्रबंधन की दृष्टि से एक राजा तथा प्रशासन की भूमिका तथा कर्तव्यों को यह पुस्तक स्पष्ट करती है. यह पुस्तक एक राज्य के सफल संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है. उदाहरण के लिये यह न सिर्फ़ आपदाओं तथा अनाचारों से निपटने की राह बताती है बल्कि अनुशासन तथा नीति-निर्धारण के तरीकों का भी उल्लेख करती है. इसी विषय पर लिखी एक और पुस्तक है ‘द प्रिंस‘ जो कि मैकियावेली द्वारा रचित है, हालांकि विषय समान होते हुए भी यह पुस्तक चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ से सर्वथा भिन्न है. मैकियावेली पन्द्रहवीं शताब्दी के इतालवी राजनैतिक दार्शनिक थे. अपनी सत्ता को का़यम रखने के लिये एक महत्वाकांक्षी उत्तराधिकारी को क्या नीतियाँ अपनानी चाहिये, उनकी किताब इसी विषय पर केंद्रित है. उनके विचार अतिवादी माने जाते हैं क्योंकि उनके मतानुसार तानाशाही राज्य में स्थिरता बनाये रखने का सर्वोत्कृष्ट मार्ग है. शक्ति तथा सत्ता प्राप्ति को उन्होंने नैतिकता से भी महत्वपूर्ण माना है. लगभग २००० वर्षों के अंतराल वाली इन दो कृतियों की तुलना करना बेहद रोचक है.

दुनियाँ मुख्यत: मैकियावेली को ही जानती है. भारतीय होने के नाते हम कम से कम इतना तो ही कर ही सकते है कि सर झुका कर उस महान शख्सियत को नमन करें जिसका नाम था-चाणक्य.

8 टिप्पणिया

  1. आचार्य चाणक्य पर यह उम्दा लेख पढ़कर उनके बारे में काफ़ी जानकारी मिली। हाल में मैंने कहीं पढ़ा था कि कौटिल्यकृत अर्थशास्त्र पर चीन में गहन शोध किया जा रहा है। जबकि भारत में उनकी महान कृतियों की अनदेखी हो रही है।


  2. हां भई. अच्छा सीरियल था चाणक्य.


  3. बहुत अच्छा लेख है.इसे आप लोग विकी में डाल दीजिये ताकि सब लोग इसे देख सकें और जिसे इसमें कुछ जोड़ना हो जोड़ सके.इतने दिन लिखने में जो
    लेख कम लिखे उसकी भी भरपाई करने के लिये और लेख लिखें.


  4. कह सकते हैं भारत ने तीन कालो में तीन महान राजनितीज्ञ देखे, कृष्ण के बाद चाणक्य और बाद में सरदार पटेल.


  5. बहुत अच्छा और सारगर्भित लेख है।
    “हम करें राष्ट्र आराधन” गीत के रचनाकार का नाम भी दे दिया जाए तो बहुत अच्छा रहेगा ……. रचनाकार को लेकर काफी विवाद हुआ था ।
    डॉ॰ व्योम


  6. धन्यवाद !

    चाणक्य पहले शख्स थे जिन्होने अखंड भारत का सपना देखा था। उन्होने यह एक गुरू की शक्ति को भी दिखाया था कि एक गुरू किसी चरवाहे को पाटिलपुत्र का सम्राट भी बना सकता है।


  7. प्रतीक भाई, नीरज भाई, अनूप जी, संजय भाई, आशीष भाई और आदरणीय डॉ॰व्योम जी, आपने हमारा उत्साहवर्धन किया और ज्ञानवर्धक टिप्पणियाँ कीं उसके लिये आभार.

    डॉ॰व्योम जी, हमको इस गीत के रचनाकार का नाम ज्ञात नहीं है. यदि आपको आप कुछ ज्ञात हो तो कृपया प्रकाश डालें.


  8. चाणक्य के बारे मे पढ कर अच्छा लगा । वैसे आपकी ये अनुदिनी बहोत सुंदर है । इस अच्छे कार्यको हमेशा आगे बढाये । मेरी शुभकामना !



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