Archive for अगस्त 15th, 2006

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अर्पण

अगस्त 15, 2006

वन्दे मातरम् – सन् १८७५ की अक्षय नवमी को कंतलपाड़ा कस्बे के एक घर में बैठे ३७ बर्षीय युवक बंकिम की कलम पर माँ सरस्वती का डेरा जमा और उस कलम से निकला यह कालजयी क्रान्तिकारी गीत. हर दिल को छू गये ये शब्द. कितने सहज, कितने सरस, कितने कोमल, कितने पावन! और यदि लहू में दौड़ जायें तो इतने प्रचंड कि झंझावात बनकर शत्रु को अंतिम सीमा तक खदेड़ दें. गली में रणभेरी सी होती – वन्दे मातरम्, और निकल पड़ती सहस्रों नवयुवकों और बालकों की टोली ब्रिटिश सरकार के परखच्चे उड़ाने.

इतने सुंदर शब्द कि जिस सुर में गाओ, अपने से लगें. कभी राग काफ़ी, कभी झिंझोटी, कभी सारंग, कभी देस – जिसने जो चाहा उस सरगम में इन्हें महसूस किया. नेताजी की आज़ाद हिन्द फ़ौज में ‘कदम कदम बढ़ाये जा’ जैसे गीत को जामा पहनाने वाले कैप्टन राम सिंह ने तो वन्दे मातरम् की एक धुन प्रयाण गीत की तरह रच दी! बैण्ड की थाप पर सैनिकों के थिरकते कदम और इस धुन में बजता हुआ वन्दे मातरम्! आह, क्या मनोरम दृश्य रहा होगा!

दूरदर्शन पर कितनी ही बार सुबह-सुबह वन्दे मातरम् की धुन सुनकर जागते थे हम सब, ठीक वैसे ही जैसे कि हमारा देश जागा था बरसों पहले इस पुण्य श्लोक की गूंज सुनकर! आज उस जागरण के साठवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं हम, और इस पावन अवसर पर माँ भारती के चरणों में अर्पित कर रहे हैं अपना एक प्रयास, इस चिट्ठे के माध्यम से.

अपने इस चिट्ठे पर भारत, इसके भूत, वर्तमान और भविष्य से जुडे़ सभी पहलुओं, साहित्य, राजनीति, विज्ञान, संगीत आदि पर चर्चा होगी. और बालक को तो अधिकार है ही अपनी माँ से रूठ जाने का, सो कभी-कभी ऐसे विषय भी चर्चा में होंगे जिनमें यह बालक अपनी माँ की किसी बात से अप्रसन्न होकर रूठा हुआ है.

 

वन्दे मातरम्: कुछ झलकियाँ

 

हमारा परिचय: हम कुछ भारतीय चिट्ठाकार हैं जो अपने इस चिट्ठे ‘वन्दे मातरम्’ में एक संयुक्त छद्मनाम ‘स्वाधीन’ के परचम तले अपने विचार प्रकट करेंगे. हमारा उद्देश्य है सर्वप्रथम हिन्दी चिट्ठाजगत, और तत्पश्चात् जन-जन को भारत के गौरवशाली इतिहास, विज्ञान आदि का बोध ठोस तथ्यों के माध्यम से कराना और इस प्रकार भारतमाता की सेवा करते हुए एक स्वर्णिम भविष्य की नींव रखना. निश्चित ही इस प्रक्रिया में हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, स्वाध्याय से और आप सब से.

आप सबको स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें!

वन्दे मातरम्!

आपके,
स्वाधीन

(निधि श्रीवास्तव, नोयडा, भारत
अमित कुलश्रेष्ठ, लूवां, बेल्जियम
परेश मिश्रा, कोपनहेगन, डेनमार्क
दिव्या श्रीवास्तव, कोपनहेगन, डेनमार्क
कनव अरोड़ा, कोपनहेगन, डेनमार्क
उमेश कढ़णे, आरहुस, डेनमार्क
सरिता विग, फ़्लोरेंस, इटली
नूतन गौतम, कानपुर, भारत
कैलाशचन्द्र पंत, पुणे, भारत
विवेक वर्मा, वेल्स, यू.के.
अभिजीत सिंह, इंदौर, भारत)

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