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पूछे लाल पुछक्कड़ – ८

February 1, 2007

लाल पुछक्कड़ चाचा हाज़िर हैं एक लम्बे अरसे के बाद. छुट्टी पर थे पुछक्कड़ चाचा, ज़रा निकल गये थे दुनियाँ की सैर पर. बहुत सारे देश देखे, बहुत सारे लोगों से मिले. अमीरों से मिले, ग़रीबों से मिले, फ़कीरों से मिले, लकीरों के फ़कीरों से मिले. बड़े से बड़े भिखारी देखे, पैसों के पीछे पागल शिकारी देखे, रोटी को तरसते लोग देखे, पंचतारा होटलों के भोग देखे. टॉमी को मखमल के गद्दे में सोते देखा, हरिया को कड़ाके की सर्दी में रोते देखा. ये देखा… वो देखा… जाने दीजिये, मुद्दे की बात पर आया जाये.

तो आज का सवाल रहा ये. नीचे दिया जा रहा है विश्व का एक मानचित्र जिसमें अलग-अलग देशों को एक विशेष मानदण्ड के आधार पर अलग-अलग रंगों से दर्शाया गया है. जैसे भारत, रूस, फ़्रांस तथा पाकिस्तान का है एक जैसा धानी रंग और चीन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका रंगे हुये हैं कुछ भूरे-गेंहुँए रंग से. तो सवाल तो आप समझ ही गये होंगे! जी हाँ, आपको बताना है कि वह मानदण्ड क्या है जिसके आधार पर इस मानचित्र को रंगा गया है?

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सवाल कठिन है तो अता-पता फिर से बतायें क्या! नहीं बताते. अरे नाराज़ होने की क्या बात है. चलिये आपको खुश करने के लिये निदा फ़ाज़ली की एक ग़ज़ल की दो पंक्तियाँ सुना देते हैं अपनी आवाज़ में – दो में दो का भाग हमेशा एक कहाँ होता है, सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला!

मानचित्र साभार: विकिपीडिया

3 comments

  1. भईया जी, आप वापस आ गये, वही बहुत है. हमारे मन में तो बहुत खराब खराब विचार आने लगे थे मगर आप तो गौतम बुद्ध हो कर लौटे..क्या क्या देखकर…लकीरों के फ़कीरों से मिले…हमसे काहे नहीं मिले… खैर, वापसी की बधाई..अब न जाना इस तरह बिन बताये…दिल ही बैठा देते हो आप तो.. :) इस पहेली का उत्तर नहीं मालूम…न ही ढ़ूंढ़ने का प्रयास किया..अभी सब के साथ भीड़ मे डकैती प्रकरण में लगा हूँ, अन्यथा न लेना.. वैसे भी आजकल स्थिती अच्छी नही चल रही है..डकैत भी सबको लूट रहे हैं हमें नहीं लूट रहे… बहुत दिन बाद आये हो, यहाँ देखो-विचार विमर्श में सहयोग दो: http://www.akshargram.com/2007/01/31/586/


  2. मुझे नही पता


  3. पहेली का हल तो पता नहीं पर इतना जरूर पता चल गया है कि निदा फ़ाजली की पंक्तियाँ आपने बदली है उसमें कोई बहुत बड़ा रहस्य छिपा है!!
    सही कविता इस तरह है
    दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है
    सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला



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