आज भारतीय वायु सेना का पिचहत्तरवां जन्मदिवस है. हमारी वायु सेना विश्व की चार सबसे बड़ी वायु सेनाओं में से एक है. समय चाहे युद्ध का हो या शान्ति का, हमारी सेनायें सदैव अपना शौर्य और पराक्रम प्रदर्शित करती रही हैं. आज हमारे पास विश्व के सर्वश्रष्ठ लड़ाकू यान हैं – जागुआर, सुखोई और मिग के कई स्वरूप, और कुछ समय बाद हमारा अपना तेजस भी वायु सेना की शोभा बढ़ायेगा.
इस बार वायु सेना दिवस के आयोजन का प्रमुख स्थल था हिन्डन, ग़ाज़ियाबाद स्थित वायु सेना का अड्डा. इस समारोह ऐसा में बहुत कुछ था जो पहली बार हुआ. यह विश्व में पहला मौका था जब किसी देश की वायु सेना के प्रमुख सीधे वायु मार्ग से ही किसी समारोह में उतरे हों. जी हाँ, ६१ वर्षीय एयर चीफ़ मार्शल शशीन्द्र पाल त्यागी कोई कार या जीप नहीं, बल्कि एक पैराशूट लेकर समारोह में उपस्थित हुए!
परेड तो होनी ही थी, उसके बाद अपनी ही तरह की पहली (संगीतमय) ड्रिल परेड भी हुई. इसमें वायु सेना के जवानों का अद्भुत सामंजस्य देखते ही बनता था. सुखोई और मिग विमानों की कलाबाज़ियाँ दिखाकर हमारे विश्वस्तरीय चालकों ने सबका मन मोह लिया. इस समारोह में पहली बार सारंग दल के चार हेलीकाप्टरों ने एक साथ हवा में करतब दिखाये. ध्यान देने योग्य बात यह है कि हेलीकाप्टरों से इस प्रकार के करतब दिखाना बहुत कठिन कार्य होता है और इसके लिये कड़ी मेहनत और योग्यता की आवश्यकता होती है. विश्व में सारंग के अलावा केवल दो ही ऐसे दल हैं जो इस प्रकार का प्रदर्शन करने में सक्षम हैं! कार्यक्रम में इसके अलावा युद्ध में घायल सैनिकों को तत्परता के साथ सुरक्षित स्थान तक ले जाने की कार्यवाही का भी प्रदर्शन किया गया.
अंत में सूर्य-किरण दल ने भी आकाश में गोते लगाते हुए अलग अलग आकारों में तिरंगे को उकेरा.
इन सब से हमें न केवल गर्व की अनुभूति होती है, बल्कि देशवासियों में सुरक्षा की भावना भी आती है. हम कामना करते है कि हमारी वायु सेना सारी सीमायें लांघकर आकाश को छू ले, जैसा कि वायु सेना का आदर्श वाक्य है, और भगवद् गीता के ग्यारहवें अध्याय के चौबीसवें श्लोक की आरम्भिक पंक्तियाँ भी – नभ: स्पर्शं दीप्तम्.
अगर आप दूरदर्शन पर इस कार्यक्रम को न देख पाये हों तो यहाँ अवश्य देखिये, पूरे दो घण्टे तक मंत्रमुग्ध कर देने वाला एक जादू!
