सारी दुनियाँ में ११ सितम्बर का दिन मानवता के इतिहास में काली स्याही से लिखा जाता है, क्यों? ना, ना सवाल यह नहीं है. लाल पुछक्कड़ चाचा को पता चला है कि जिस दिन को सारी दुनियाँ आतंकवादी कार्यवाही के लिये जानती है, उसी दिन अर्थात् ११ सितम्बर को बरसों पहले भारतमाता के दो महान सपूतों ने अलग-अलग समय विश्व को प्रेम का संदेश दिया था, अहिंसा का संदेश दिया था, आध्यात्म का संदेश दिया था. आपको बताना है कि यहाँ किन दो सपूतों की बात की जा रही है, और किस परिप्रेक्ष्य में?
आपको कोई संकेत चाहिये प्यारे भाईयों और बहनों? सोचिये और बताइये.
