Archive for September 5th, 2006

h1

पूछे लाल पुछक्कड़ – ४

September 5, 2006

आज का सवाल रहा ये – आपको दिया जा रहा है एक श्लोक

दीर्धचतुरस्रस्याक्ष्णयारज्जु: पार्श्वमानी तिर्यंगमानी च
यत्पृथग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति ||

तो बताईये कि यह श्लोक आखिर है क्या?

अरे, अरे! घबराने की कोई बात नहीं है, पूरा-पूरा शाब्दिक अर्थ नहीं पूछ रहे हैं. आपको संस्कृत का विद्वान होने की भी कोई जरूरत नहीं है. लाल पुछक्कड़ चाचा को पक्का भरोसा है कि आपमें से लगभग सभी लोगों ने अपने स्कूल में इस श्लोक को किसी न किसी रूप में देखा हुआ है! हाँ, यह बात अलग है कि मास्टर जी के डण्डे भी बहुत खाये होंगे, आड़े-तिरछे डण्डे! कभी हाथ पर, कभी पीठ पर. देखते हैं इस बार कौन सही जवाब देता है, किसका मुकद्दर अच्छा है? वैसे तो मुकद्दर रेखाओं का खेल है, फिर भी!